प्रमुख गतविधियाँ :

क्रीडा क्षेत्र में “आदर्श क्रीडा संस्कृती, शुद्ध चरित्र और देश भक्ती” की और ध्यान बढाने के लिए विविध उपक्रम किये। सभी जगह पंचसूत्री के आधारपर कार्यक्रम होते हे।

 

  1. सूर्यनमस्कारसर्वांग को संस्कारक्षम व्यायाम देनेवाला यह संपूर्णत: भारतीय संस्कृती का अविष्कार हे। सर्वांगसुंदर इस व्यायाम प्रकार का प्रचार-प्रसार पूरे विश्वमें करनेका प्रयास क्रीडा भारती कर रही हे। सामुहिक सूर्यनमस्कार कराने के लिए मार्गदर्शक सीडी का निर्माण किया हे। पार्श्वसंगीत पर केवल ८ मिनटमें १३ सूर्यनमस्कार का विकल्प आजके गतिमान युग के लिए समाजके सामने रखा हे। देश-विदेशोंमें प्रतियोगिताएँ एवं कार्यक्रमों द्वारा सूर्यनमस्कार प्रचार-प्रसार जारी हे।
  2. २९ अगस्त – राष्ट्रिय खेल दिवसभारत के महान देशभक्त खिलाडी स्व. ध्यानचंदजी के जन्मदिवस के अवसर पर सभी जगह ‘राष्ट्रिय खेल दिवस’ के उपलक्षमें विविध खेलोंका/प्रतियोगिताओंका आयोजन किया जाता है।
  3. हनुमान जयंती (चैत्री पौर्णिमा)हनुमानजीके जन्म दिन के अवसरपर क्रीडा भारती का कार्य प्रारंभ हुआ। “क्रीडा भारती दिवस” के उपलक्ष में विविध कार्यक्रम, संपर्क आदि अभियान करते है।
  4. वीरमाता जिजामाता पुरस्कारराष्ट्र निर्माण के लिए छत्रपती शिवाजी महाराज का आदर्श पुरे देशमें स्विकृत है। छ. शिवाजी महाराज का लालन पालन वीर जिजमाताने जिस तरह किया वह इतिहासमें बेजोड मिसाल है। क्रीडा क्षेत्रमें प्रांतीय, राष्ट्रीय एवं केंद्र द्वारा पुरस्कार प्राप्त खिलाडियोंका सम्मान सभी करते है। खिलाडियोंका लालन पालन करनेवाले जन्मदाताओंका विशेषत: माताओंका सम्मान “वीरमाता जिजामाता पुरस्कार” देकर क्रीडा भारती करती है।
  5. क्रीडा ज्ञान परीक्षाक्रीडा विषय में रूचि बढाने के लिए स्कूलो में क्रीडा ज्ञान परिक्षा का आयोजन किया जाता है। बच्चोंके साथ पालकों की भी रूचि खेलोंमे बढे इसलिए प्रश्नपत्रिका घर ले जाने की अनुमती देते है। इस कारण क्रीडा भारती का कार्य घर घर तक पहुंचता है।

अन्य गतिविधियाँ :

रिले अल्ट्रा मॅरेथान : भारतीय स्वतंत्रता के ५० वर्ष पूरे होने के उपलक्ष में १९९७ में पुणे-शनिवार वाडा से मुंबई के गेट वे ऑफ इंडिया तक ४७५ किमी दौड का आयोजन। १० धावकोंके एक संघ जैसे ३० संघोकी सहभागीता थी। ४ दिन में यह दौड पूर्ण हुई। एक दिनमें १३७ किमी की दुरी पूर्ण करनेका इतिहास इसी दौड में रचा गया।
सेमिनार – संगोष्ठीका आयोजन : Not only Physical Training but Sports should made compulsory as core subject in schools विषयपर सेमिनार का आयोजन डोंबीवली में किया था। चेन्नई, महाराष्ट्र, चंडीगढ, मध्यप्रदेश, हरियाणा, गोवा सहित अन्य प्रांतोके विशेषज्ञोंने भाग लिया। सेमिनार में पारित प्रस्ताव केंद्र सरकारके खेल विभागको प्रस्तुत किये गये, जो लगभग सभी स्वीकार किए गए।
अ. भा. क्रीडा साहित्य सम्मेलन : खेल विषयोंपर प्रकाशित अनेक पुस्तकों का समाज को कराने के लिए कोल्हापूर (महाराष्ट्र) में अखिल भारतीय स्तर पर क्रीडा साहित्य सम्मेलन का आयोजन किया था। देश के सभी जगहोसे उपस्थित इस सम्मेलन में खेल साधनो का भी परिचय कराया गया।

 

  1. पुरे देश में सूर्यनमस्कार के कार्यक्रम हुए। सुरत, वडोदरा, कर्णावती (गुजरात), ग्वालियर, भोपाल (म. प्र.), टोंक, जयपूर (राजस्थान), त्रिवेन्द्रम (केसल), कोलकता (बंगाल), धनबाद, राँची (झारखंड), आग्रा, हापुर (उ. प्र.), मालेगांव, चिंचवड (पुणे), जलगांव, औरंगाबाद (महाराष्ट्र) तथा अन्य शहरों में सूर्यनमस्कार के विशाल कार्यक्रम हुए।
  2. डॉ. हेगडेवार स्वतंत्रता दौड : राष्ट्र चेतना के लिए प्रतिवर्ष १४ अगस्त को दौडकी प्रतियोगिता का आयोजन होता है। इस वर्ष ५००० छात्र-छात्राओंने सहभाग लिया।
  3. वीर जिजामाता पुरस्कार :
  4. आंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय तथा राज्य पुरस्कारों से सम्मानित खिलाडियों के माता-पिताओं का सम्मान दिल्ली में हुआ। देशभर से खिलाडियों के माता-पिताओं को आमंत्रित किया था। सभी खेलों के ३५ खिलाडिओं के माता-पिताओं ने सहभाग लिया। उस कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमान राजा रणबीरसिंहजी (Vice President, Indian Olympic Association) ने की। कार्यक्रम का आयोजन, व्यवस्था और पुरस्कार की संकल्पना को समझकर श्रीमान रणबीरसिंहजी फुले न समाये। यह कार्यक्रम की स्मृती सभी को जीवनभर रहेगी।
  5. क महाराष्ट्र के सांगली शहर में वीरमाता जिजामाता पुरस्कार प्रतिवर्ष हो रहा है। एक पहिया सायकल का भारत में एवं विश्व में रिकॉर्ड प्रस्थापित करनेवाले श्रीमान दिपक लेलेजी के माता-पिताजी का सम्मान टेनिस के पूर्व आंतरराष्ट्रीय खिलाडी श्रीमान नंदन बाळजी के हाथों किया गया। श्री. लेलेजी के विश्व रिकॉर्ड को २५ साल पुरे होने के वर्ष में ही यह सम्मान दिया गया। श्री. नंदन बाळजी ने इस संकल्पना की भुरी भुरी प्रशंसा की।
  6. बेळगाव (कर्णाटक) में वीरमाता जिजामाता पुरस्कार का कार्यक्रम जोर-शोर से हुआ। वर्तमानपत्र में ज्ञापन देकर खिलाडियों की जानकारी प्राप्त की गयी। जिलास्तर से लेकर राष्ट्रिय स्तर के सभी खिलाडियों ने जानकारी भेजी थी। जिस में से १४० खिलाडिओं का चयन बडे कष्ट से किया था। सभीसे संपर्क करके खिलाडिओं के माताओंका सम्मान किया गया। माताओंको पुरस्कार वितरण के लिए समाजसेविका श्रीमती सिंधुताई सपकाळ उपस्थित थी। कार्यक्रम में लगभग २००० नागरिकों की उपस्थिती थी।
  7. हापुड (मेरठ, उ. प्र.) में खेल ग्राम का आयोजन : हापुड विश्वविद्यालयमें खेल ग्राम का आयोजन किया था। लगभग २५०० खिलाडिओं के साथ ५००० लोगोंकी सहभागिता हुई। १००, २००, ८०० मिटर दौड, योगासन, ज्युडो, शरिर सौष्ठव, शतरंज, शूटिंग बॉल, इ. खेलोंका आयोजन हुआ। मा. राजनाथसिंह, मा. केसरीजी, प्रदेश के सभी खासदार, आमदार इ. नेता गण उपस्थित थे।
  8. रतलाम में राष्ट्रीय खेल संगम का आयोजन : नवम्बर २०१२ में रतलाम में राष्ट्रीय खेल संगम के समापन में राष्ट्रीय खेल संगम का आयोजन किया था। ५५० कार्यकर्ताओं की सहभागिता हुई। तीन दिन हुए इस राष्ट्रीय खेल संगम के समापन कार्यक्रम में विश्वमें प्रसिद्ध योगगुरू बाबा रामदेवजी उपस्थित थे। सूर्यनमस्कार, लेझीम, योगासन, गोफ एवं मर्दानी खेलोंका प्रदर्शन की भूरी भूरी प्रशंसा बाबा रामदेवजी ने की। देसी खेलों के लिए विशेष प्रयास करनेका आवाहन श्री रामदेव बाबाजीने किया।